Thursday, November 09, 2017

चंडीगढ़ में अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन शुरू

गांव गांव में ज़रूरत है ऐसे आयोजनों की तांकि भाषा का सौहार्द बना रहे
चंडीगढ़//लुधियाना: 9 नवंबर 2017: (कार्तिका//पंजाब स्क्रीन)::
मेरा जन्म एक पंजाबी परिवार में हुआ। एक ऐसा परिवार जहां हर भाषा का सम्मान करना सिखाया जाता है। इसके बावजूद मेरे बोलचाल की मुख्य भाषा काफी देर तक पंजाबी ही रही।  धीरे धीरे कब यह हिंदी और पंजाबी का मिक्स अंदाज़ आ गया खुद भी याद नहीं आता। जब सितंबर-2017 में पीएयू ने एक प्रतियोगिता का आयोजन कराया तो उस समय भी मेरी पंजाबी काव्य रचना को ही प्रथम पुरुस्कार मिला। इस सब के बावजूद मेरा हिंदी प्रेम कभी कम नहीं हुआ। हिंदी में लिखना, हिंदी में पढ़ना मेरे स्वभाव में उसी तरह शामिल रहा जिस तरह मैं गांवों की ठेठ पंजाबी के शब्द समझने की कोशिश करती। मैंने मैक्सिम गोर्की की महान रचना-"मां" हिंदी में ही पढ़ी। ओशो की बहुचर्चित रचना "एक ओंकार सतनाम" भी हिंदी में ही पढ़ी। दुष्यंत कुमार के शेयर मुझे बिना प्रयासों के ज़ुबानी याद होने लगे। शायद यह सिलसला यूं ही चलता पर पत्रकारिता की पढ़ाई के कारण अख़बारों और टीवी की खबरों में भी दिलचस्पी बढ़ने लगी। कभी कभी हालात में कुछ गर्माहट आती तो अख़बारों की सुर्खियां भी भयभीत करने लगती। मैंने न तो 1947 का बटवारा देखा, न ही जून-1984 का ब्ल्यू स्टार आपरेशन और न ही नवंबर-1984 का अमानवीय नरसंहार। जब रूस के अक्टूबर इंकलाब की चर्चा सुनती तो बहुत अजीब  सा लगता कि इस अक्टूबर इन्कलाब का दिन नवंबर में क्यों आता है? इस तरह के कई सवालों का जवाब तलाश करने की इच्छा मुझे अक्सर इतिहास की किताबों के नज़दीक ले जाती। इसी बीच ज़ोर पकड़ा पंजाबी भाषा के सम्मान के अभियान ने। सैद्धांतिक तौर पर बात सही थी कि पंजाब में पंजाबी को प्रथम स्थान आखिर क्यों नहीं दिया जाता। दक्षिण भारत में जहाँ के लोग हिंदी के नाम से भी दूर भागते हैं वहां हिंदी को तीसरे स्थान पर लिखा जाता है।  यहां तक कि रेलवे स्टेशनों पर भी।  अन्य स्थानों पर तो हिंदी नज़र भी नहीं आती। इन सभी तथ्यों के बावजूद मुझे यह बहुत ही दुखद लगता कि पंजाब में जहां जहां हिंदी लिखी है वहां वहां कालख पोत दी जाये। पंजाबी का सम्मान बहाल हो यह तो मैं भी चाहती थी लेकिन इसके लिए हिंदी पर कालख पोतनी पड़े यह सही न लगता।  दुःख था। बेबसी थी। कुछ कुछ शर्मिंदगी का अहसास भी।  कुछ गुस्सा भी। सियासत की जंग में मुझे अपनी और आम लोगों की हालत बहुत ही कमज़ोर लगती।
खुद से सवाल करती कि क्या सचमुच सिख धर्म के संस्थापक गुरु साहिबान संस्कृत और फारसी का भी सम्मान करते थे? अगर यह सच है तो उन्हें मानने वाले हिंदी पर कालख क्यों पोतना कहते हैं? बहुत गुस्सा आता उन लोगों पर भी जिनको हिंदी नहीं आती थी लेकिन पंजाबी सूबा के समय  समय जिन्होंने पंजाबी में बोल बोल कर  कि लिखो हमारी मातृ भाषा हिंदी है। हिंदी पंजाबी और अन्य भाषाओं के दरम्यान जिस पुल की बात मैं सोच रही थी वह मुझे अपनी कल्पना ही लगता।  महसूस होता यह कभी साकार नहीं होगी। मुझे लगता कि बस शायद यहां सियासत ही जीत सकती है और न कोई सिद्धांत-न कोई धर्म और और न कोई विचार। 
इसी निराशा में एक दिन पता चला कि चंडीगढ़ में अखिल भारतीय महिला कवि सम्मेलन हो रहा है। जाने की इच्छा भी थी लेकिन कालेज के टेस्ट और कुछ अन्य समस्याएं आड़े आ रही हैं। जब विस्तार से जानकारी ली तो पता चला कि हर पंजाबी शायरा को अपनी पंजाबी रचना के साथ साथ हिंदी अनुवाद भी बोलना है। यह जान कर न जा पाने का दुःख भी हुआ। पता चला कि इस आयोजन में भाग लेने के लिए तकरीबन 300 महिला शायर भाग लेंगीं। यह जानकारी चंडीगढ़ में आल इंडिया पोइटिस कांफ्रेस के संस्थापक डा. लारी आज़ाद ने एक पत्रकार सम्मेलन में दी। डा. लारी आज़ाद ने वास्तव में दुनिया देखी है। सियासत की भी और साहित्य की भी। मोहमद अकरम लारी ने सत्तर के दशक में भरतीय धर्मों और सियासत पर बहुत सी पुस्तकें भी लिखीं हैं। वह बहुत सी वशिष्ठ पत्रिकाओं का सम्पादन भी करते हैं।  इसलिए भारत में धर्म-सियासत और भाषा की वास्तविक स्थिति को भी बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। इस संगठन के पास आठ हज़ार प्रमुख महिलाएं पंजीकृत है जिनमें से कोई शायरा है, कोई लेखिका, कोई कलाकार, कोई टीवी पर, कोई रेडियो  पर और कोई किसी अन्य में। इनमें कई प्रमुख लोगों से भेंट होती, उनसे मिलने का अवसर मिलता। अब भी कोशिश रहेगी। 
कुल मिला कर प्रसन्नता की बात है कि यह एक ऐसा मंच है जिसे आधार  बना कर पंजाबी के पुल हिंदी और अन्य भारतीय भाषायों से जोड़े जा सकते हैं। सलाम है ऐसे आयोजन को।  सलाम है इसके आयोजकों को। इस तरह के आयोजन होते रहें और विभिन्न भाषाओं के लेखक और कलाकार अलग अलग प्रदेशों और संस्कृतियों को आपस में जोड़ने के सफल प्रयास करते रहें। समाज जुड़ा रहे इसकी उम्मीद अब कलमकारों से ही बची है। इस तरह के आयोजनों की आज सबसे अधिक ज़रूरत हैं। केवल राज्यों की राजधानियों में ही नहीं बल्कि गांव गांव में इनकी ज़रुरत है। आखिर में एक बार फिर सलाम। कवरेज के लिए एक बार अवश्य जाना होगा इस आयोजन में, बाकी की बातें फिर कभी सही। किसी अगली पोस्ट में।  -कार्तिका (लुधियाना)

Monday, October 23, 2017

हमें पंजाबी होने पर गर्व है : नायब शाही इमाम मौलाना उसमान रहमानी

Mon, Oct 23, 2017 at 5:30 PM

पंजाबी के लिए संघर्ष करने वालों के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द हो  
लुधियाना: 23 अक्तूबर 2017(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो):: 

आज यहां जामा मस्जिद लुधियाना से नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी ने अपनी पंजाबी मातृभाषा के हक में जोरदार आवाज उठाई। उन्होनें कहा कि पंजाब भर में दिशासूचक बोर्डो पर अकाली-भाजपा सरकार के समय पर मातृ भाषा पंजाबी के साथ किए गए भेद-भाव की जितनी निंदा की जाए कम है। पंजाब में बीते कुछ दिनों से पंजाबी मातृ भाषा के सम्मान के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मातृ भाषा के लिए संघर्ष कर रहे नौजवानों पर पुलिस द्वारा दर्ज किया मुकद्दमा निंदनीय है। मौलाना उसमान ने कहा कि पंजाबी हमारी मातृ भाषा है और हमें पंजाबी होने पर गर्व है। उन्होनें कहा कि देश के सभी राज्यों में वहां की भाषाओं को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन अफसोस की बात यह है कि पंजाब जहां देश के सभी राज्यों के लोग तकरीबन व्यापार के लिए आते हैं में पंजाबी के साथ भेद-भाव किया जा रहा है। उन्होनें कहा कि ये भी अफसोस की बात है कि कुछ लोग दिशासूचक बोर्डो पर पंजाबी भाषा को प्रथम स्थान दिलवाने के लिए उठाए गए कदम को हिंदी का अपमान बता कर पंजाबी मातृ भाषा के संघर्ष को रोकना चाहते है। उन्होनें कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है लेकिन सबसे पहले मातृ भाषा पंजाबी को ही लिखा जाएगा और हमें यह अधिकार संविधान ने दिया है। मौलाना उसमान लुधियानवी ने कहा कि पंजाबी मातृ भाषा के लिए जो भी लोग संघर्ष करेंगे हम उनके साथ है। उन्होनें कहा कि मातृ भाषा ही कौमों के वजूद को जिंदा रखती है। पंजाबी मातृ भाषा की रक्षा करना प्रत्येक पंजाबी पर फर्ज है। इस संघर्ष को किसी भी धर्म या जाति के साथ जोड़ कर नहीं देखना चाहिए। उन्होनें कहा कि जिन्हें पंजाबी नहीं अच्छी लगती या वो चाहते है कि पंजाब में पंजाबी को पहला स्थान ना दिया जाए तो ऐसे लोगों को चाहिए कि वह पंजाब को छोड़ कर किसी ऐसे स्थान पर जाए जहां की भाषा उनकों अपनी मातृ भाषा लगती है।

Monday, October 09, 2017

मस्जिद वलीपुर में धार्मिक आयोजन संपन्न

Mon, Oct 9, 2017 at 5:20 PM
समाज में प्रत्येक जीव का सम्मान करें:नायब शाही इमाम
वलीपुर में नायब शाही इमाम मौलाना उसमान लुधियानवीं का सम्मान करते हुए मुहम्मद नबी जान व अन्य
लुधियाना: 9 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज यहां वलीपुर में स्थित मस्जिद मदरसा महमूदिया में हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम की जीवनी पर एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उसमान रहमानी लुधियानवी शामिल हुए। नायब शाही इमाम ने संबोधित करते हुए कहा कि अल्लाह ताआला के प्यारे नबी हजरत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहीवसल्लम का फरमान है कि समाज में सभी व्यक्तियों को बराबर सम्मान देना चाहिए, किसी के साथ भी उसकी जाति व धर्म को लेकर भेदभाव नहीं किया जा सकता। मौलाना उसमान लुधियानवी ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि नफरतें खत्म करके मोहब्बतें बांटी जाएं। उन्होनें कहा कि हकीकत में धार्मिक इंसान वही है जो कि अपने दिल में किसी के लिए बुराई नहीं रखता। इस अवसर पर मदरसे के प्रमुख मौलाना नबीजान, मुहम्मद सिराज खान, डा. हारुन बाली की ओर से नायब शाही इमाम मौलाना उसमान लुधियानवीं, सरपंच गुरमीत सिंह, हरमोहन सिंह, नंबरदार जगरूप सिंह, पटवारी जगीर सिंह, डा. अब्दुल रहमान, मौलाना सलीम कासमी, मौलान सऊद आलम, मौलाना फैजान, मास्टर महफूज व मुहम्मद हाबिल का सम्मान किया गया। वर्णनयोग है कि आज के इस समागम में पवित्र कुरआन शरीफ को याद करके हाफिज बनने वाले विद्यार्थी मुहम्मद चांद की दस्तारबंदी की गई। 

Monday, October 02, 2017

Ludhiana: जामा मस्जिद में खालसा ऐड के सदस्यों का सम्मान

लुधियाना के मुसलमानों ने दी 9 लाख से अधिक की सहायता

लुधियाना: 2 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

आज यहां ऐतिहासिक जामा मस्जिद में मजलिस अहरार इस्लाम हिन्द द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी के नेतृत्व में लुधियाना के मुसलमानों ने सिखों की प्रसिद्ध संस्था खालसा ऐड को रोहंगिया पीडि़तों के लिए बांगलादेश में लगाए गए लंगर के लिए 9 लाख 32 हजार 20 रूपये की सहायता राशि दान दी, जिसमें 1 लाख रूपये की नकद राशी गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के मुख्य सेवादार प्रितपाल सिंह की तरफ से दी गई। इस मौके पर शाही इमाम पंजाब द्वारा खालसा ऐड के सदस्यों का मानवता के लिए की जा रही कोशिशों को देखते हुए उनका सम्मान भी किया। इस अवसर पर शहर की विभिन्न मस्जिदों के सदस्य, इमाम व गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के मुख्य सेवादार सरदार प्रितपाल सिंह, खालसा ऐड के सदस्य परमपाल सिंह, दमन जीत सिंह,गुरसाहिब सिंह, जपनीत सिंह,,गगनदीप सिंह, कुंवर पुष्पिंदर सिंह, रमनदीप सिंह, हरसिमरन सिंह उपस्थित थे। इस अवसर पर संबोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान ने कहा कि रोहंगिया मुसलमानों पर किया गया अत्याचार हकीकत में इंसानियत के खिलाफ एक नापाक कदम है, उन्होनें कहा कि इस्लाम धर्म ने मानवता और आपसी भाईचारे का संदेश दिया है, संसार में जो भी लोग पीडि़तों की सहायता करते है मुसलमान उनका साथ देते आये है। उन्होंने कहा कि पीडि़तों को जाति और धर्म के आधार पर नही देखा जा सकता। अमरनाथ तीर्थ यात्रियों पर जब आंतकी हमला हुआ तो लुधियाना के मुसलमानों ने पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन किया था और कारगिल की जंग के समय में भी प्रधानमंत्री राहत कोष में राशि देने वालों में मुसलमान शामिल रहे है। शाही इमाम ने कहा कि पीडि़तों के जख्म पर मरहम लगाना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। इस अवसर पर खालसा ऐड के टीम लीडर सरदार परमपाल सिंह ने कहा कि उनकी संस्था का उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबान ने हमे यह शिक्षा दी है कि पीडि़त व्यक्ति किसी भी धर्म या समुदाय का हो उसकी सहायता करना हमारा फर्ज है, परमपाल ने कहा कि देश में जो लोग धर्म के नाम पर नफरत फैलाने चाहते है वह समझ ले कि धर्मी वही है जो सभी इंसानो से प्यार करता हो। उन्होंने कहा कि आज यहां लुधियाना के मुसलमानों ने खालसा ऐड के मानवता कार्यो को देखते हुए जो राशि हमें दी है वह भी इस बात का संकेत है कि हमारे मुस्लिम भाई मानवता कार्यो में धर्म को आधार बना कर नही देखते बल्कि इंसानियत के लिए काम करने वालो का हौंसला बढ़ा रहे है। इस अवसर पर खालसा ऐड के सभी सदस्यों को शाही इमाम पंजाब द्वारा सम्मानित किया गया।

पत्रकारों की हत्या और बढ़ रही असुरक्षा के विरोध में मौन व्रत

इस बार भी खुल कर सामने नहीं आया मीडिया 
लुधियाना: 2 अक्तूबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::

देश में हो रही पत्रकारों की हत्याओं और पत्रकारों की मिल रही धमकियों के विरोध में रोष प्रकट करने के लिए प्रैस क्लब आॅफ इंडिया के आह्वान पर आज गांधी जयंती के मौके पर लुधियाना में मौन धारण कर पूरे देश के पत्रकारों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन किया गया। लुधियाना के भाईवाला चैक स्थित चुनिंदा पत्रकारों, लेखकों, अध्यापकों एवं समाज सेवकों ने एकजुट हो कर इस सिलसिलो को बंद करवाने और देश में पत्रकारों की सुरक्षा पुख़्ता करने की मांग की गई।

प्रातः ठीक साढ़े ग्यारह बजे लुधियाना के भाईवाला चैक स्थित शहीद करतार सिंह सराभा पार्क फिरोज़पुर गांधी मार्केट में मौन व्रत की शुरूआत हुई, जिस में वरिष्ठ पत्रकार सुरजीत भगत, परमेश्वर सिंह, राज जोशी, रैक्टर कथूरिया के साथ पत्रकार दीप जगदीप सिंह, जसप्रीत सिंह, स्कूल टीवी के संचालक प्रो. संतोख सिंह, अध्यापक परमजीत कौर, दविंदर सिंह, कवियत्री सुकृति भारद्धाज, समाज सेवी एवं कला प्रेमी ललित सूद ने शिरक्त की। कुल दस मिनट के रोष प्रदर्शन में पहले पांच मिनट मौन व्रत रखा गया। उसके बाद पूरी दुनिया में पत्रकारों की सुरक्षा की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए ज़ोरदार टाइम्स डाॅट काॅम के संपादक, पत्रकार एवं लेखक दीप जगदीप सिंह ने बताया कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रही अंतरराष्ट्रीय शोध संस्था रिपोर्टर्ज़ विदाऊट बाॅडर्ज़ के ताज़ा आंकड़ों की मुताबिक स्वतंत्र मीडिया के मामले में भारत 180 देशों में से पिछले साल के 133वें पायदान से खिसक कर 136वें पायदान पर चला गया है। इसके साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में भारत ईराक और सीरीया के बाद तीसरे स्थान पर है जबकि पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान भी उस के बाद आते हैं। पत्रकारों के खि़लाफ़ गाली-गलौच और धमकाने के मामले में भारत 18वें पायदान पर है। ऐसे माहौल में देश के अंदर काम कर रहे पत्रकारों के लिए जंग जैसे माहौल में काम करने की स्थिति बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि सितंबर माह में ही देश में हुई विभिन्न घटनाओं में तीन पत्रकार गौर लंकेश (बंगलौर), शांतनु भौमिक (त्रिपुरा) और केजे सिंह (मोहाली) की हत्या हो चुकी है। यही नहीं पिछले दो सप्ताह में दिल्ली-एनसीआर में 4 पत्रकारों ने वाॅटस ऐप पर धमकियां मिलने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई है। अफ़सोस की बात यह है कि करीब दो दशकों से पत्रकारों की हत्याओं और धमकाने का सिलसिला चल रहा है लेकिन आज तक किसी भी मामले में दोषियों को सज़ा नहीं मिल पाई है। दीप जगदीप सिंह ने इंटरनेशनल जर्नलिस्ट फ़ैडरेशन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब तक ऐसे मामलों में तेज़ी से कार्यावाही नहीं होती और दोषियों की सख़्त सज़ाएं नहीं दी जाती तब तक यह सिलसिला रुकने के आसार नज़र नहीं आ रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि प्रैस क्लब आॅफ इंडिया ने आज राष्ट्रीय स्तर के शांतमई मूक प्रदर्शन के द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि पत्रकारों को मिल रही धमकियों और हत्याओं के मामलों में दोषियों की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और उनके खि़लाफ कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए। राज्य सरकारों से मांग की गई है कि पत्रकारों को पेशेवर, सामाजिक और स्वास्थय सुरक्षा प्रदान करने के लिए पत्रकार भलाई फंड स्थापित किया जाए। सोशल मीडिया पर पत्रकारों को मिलने वाली धमकियों और महिला पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार को रोकने के लिए आवश्यक ढांचा विकसित किया जाए और दोषियों की पहचान कर तुरंत कानूनी कार्यवाही की जाए। इस मौके पर उपस्थित सभी ने इस बात का समर्थन किया कि अपनी सुरक्षा के बारे में पत्रकारों को ख़ुद सचेत होना होगा और अपने सभी मतभेद भुला कर एकजुट होना होगा। इस बारे में सुझाव देते हुए दीप जगदीप सिंह ने कहा कि चाहे लुधियाना में विभिन्न पत्रकार संगठन हैं जो अपने-अपने ढंग से बढ़िया काम कर रहे हैं, लेकिन सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर एक संयुक्त तालमेल कमेटी गठित करनी चाहिए ताकि पत्रकारों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एकजुटता का माहौल तैयार किया जा सके और आने वाले समय मे संयुक्त कार्यवाही का कार्यक्रम बनाया जा सके।
इस मौके पर अपने विचार देते हुए स्क्ूल टीवी के संचालक प्रो. संतोख सिंह ने कहा कि देश में बोलने की आज़ादी पर दो तरह के ख़तरा मंडरा रहा है एक तरफ एक ख़ास विचारधारा के तहत लेखकों और पत्रकारों की योजनाबद्ध तरीके से हत्याएं की जा रही हैं और दूसरी तरफ़ विभिन्न विवादित मामलों की कवरेज के दौरान भड़की हुई भीड़ द्वारा पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। यह दोनो तरह के चलन लोकतंत्र में विचारों की अभिव्यक्ति के सिद्धांत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस लिए हर किस्म के अलोकतांत्रिक चलन का विरोध करना और उनके खि़लाफ़ एकजुट होकर संयुक्त रूप से आवाज़ बुलंद करना आवश्यक है। कवित्री सुकृति भारद्वाज ने कहा कि वह पत्रकारों और लेखकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इस कदम में उनके साथ हैं। वह इन मामलों पर अपनी कलम के ज़रिए लोगों में जागरुकता फैलाने का प्रयास करेंगी और मानव अधिकारों के लिए जो भी कार्य किए जाएंगे उन में भागीदारी निभाएंगी। अध्यापिका परमजीत कौर और अध्यापक दविंदर सिंह ने कहा कि स्कूल स्तर पर ही बच्चों को विचारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में जागरुक करना चाहिए ता कि आगे चल कर एक दूसरे के विचारों से असहमत होने पर भी एक दूसरे को अपनी बात कहने देने वाला स्वभाव विकसित किया जा सके।
वरिष्ठ पत्रकारों सुरजीत भगत, परमेश्वर सिंह और राज जोशी ने उपरोक्त विचारों की प्रोढ़ता करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में बढ़ रहे ख़तरों पर चिंता प्रकट की और हर तरह का सहयोग देने का वादा किया।

Sunday, October 01, 2017

यौमे आशूरा का दिन बड़ी ही बरकतों और रहमतों वाला है

Sun, Oct 1, 2017 at 2:49 PM
10 मुहर्रम यौमे आशूरा के दिन ही कयामत आयेगी
लुधियाना: 1 अक्तूबर 2017:(पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
आज यहां पंजाब की इतिहासिक जामा मस्जिद लुधियाना में 10 मुर्हरम यौमे आशूरा के मौके पर एक धार्मिक समारोह का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान सानी लुधियानवी ने की। समारोह की शुरूआत करते हुए कारी मोहतरम साहिब ने पवित्र कुरान शरीफ की तिलावत की और गुलाम हसन कैसर, हसन नसीरावादी ने अपना नातिया कलाम पेश किया। 
इस मौके पर पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने मुसलमानों को संबेाधित करते हुए कहा कि करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन शहीद ने इंसानियत को जालिमों के खिलाफ हक की आवाज बुलंद करने का वो सबक दिया है जिसे रहती दुनिया तक याद किया जाता रहेगा। 
शाही इमाम ने कहा कि आज आशूरा का दिन बड़ी ही बरकतों और रहमतों वाला दिन है। उन्होंने कहा कि आज के दिन रोजा रखना अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद साहिब (स.) की सुन्नत है। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमें ज्यादा से ज्यादा इबादत में लगाना चाहिए। शाही इमाम ने कहा कि जो लोग यह समझते हैं कि सिर्फ दान देकर वह रब को राजी करना चाहते हैं तो वह गलत सोचते हैं। दान देने से पहले अपने कर्म अल्लाह के हुकम अनुसार करने होंगे। 
शाही इमाम पंजाब ने कहा कि यौमे आशूरा के दिन ही अल्लाह पाक ने जमीन, आसमान, हवा, पानी, इंसान और हर चीज को बनाया और 10 मुहर्रम यौमे आशूरा के दिन ही कयामत आयेगी। शाही इमाम ने कहा कि आज के दिन हमें अपने घरवालों पर दिल खोलकर खर्च करना चाहिए और इस दिन गरीबों की मदद भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी मुसलमान किसी यतीम को अच्छा खाना खिलाता है, अच्छे कपड़े पहनाता है और बाद में उसी यतीम के सिर पर प्यार से हाथ फेरता है तो जितने भी बाल उस हाथ के नीचे से निकलेंगे अल्लाह पाक उसको हर बाल के बदले में नेकियां देते हैं। 
उन्होंने कहा कि करबला के मैदान में जो कुछ भी हुआ, उससे नौजवान नस्ल को सबक लेना चाहिए। शाही इमाम ने कहा कि हमारे बच्चों को यह जानकारी होनी चाहिए कि इस्लाम धर्म के लिए हजरत इमाम हुसैन (रजि.) ने कैसी-कैसी कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने कहा कि जो कौमे अपने शहीदों को भूल जाया करती हैं, उनका बजूद खत्म हो जाया करता है। शाही इमाम ने कहा कि मुसलमान इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि करबला के शहीदों की कुर्बानियों को कभी भी भूलाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि हजरत इमाम हुसैन (रजि.) का दर्जा बहुत बड़ा है इमाम हुसैन (रजि.) हजरत मुहम्मद साहिब (स.) के नवासे हैं और हजरत मुहम्मद साहिब (स.) को इनसे बहुत प्यार था। उन्होंने कहा कि शहीद सब के होते, वो कौम का सरमाया होते हैं, उन्हें बांटा नहीं जा सकता। शाही इमाम मौलाना हबीब-उर-रहमान ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन (रजि.) ने करबला के मैदान से जो शिक्षा हमें दी है, उस पर अमल करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हक की आवाज बुलंद करने वाले, जालिमों के खिलाफ आवाज उठाने वाले ही इमाम हुसैन (रजि.) के सच्चे आशिक हैं। 
शाही इमाम ने कहा कि आज यौमे आशूरा का दिन जहां हमें हजरत इमाम हुसैन (रजि.) की कर्बुानियों से सबक देता है, वहीं अपने देश के प्रति भी कुर्बानी देने की प्रेरणा देता है। इस मौके पर शाही इमाम पंजाब ने देश में आपसी भाईचारे और अमन शांति के लिए दुआ भी करवाई।
इस मौके कारी अलताफ-उर-रहमान लुधियानवी, कारी मुहम्मद मौहतरम सहारनपुरी, मौलाना अतीक-उर-रहमान फैजाबादी, नायब शाही इमाम पंजाब मौलाना उसमान रहमानी, मुफ्ती मुहम्मद जमालुद्दीन, मौलाना कारी मुहम्मद इब्राहिम, अंजुम असगर, तनवीर खान, शाकिर आलम, मुहम्मद खालिद, परवेज आलम व शाही इमाम के सचिव मुहम्मद मुस्तकीम आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

लुधियाना पुलिस ने ढूंढ निकाला दो दिन से लापता हुआ बच्चा

6 नम्बर डिवीज़न की पुलिस ने दिखाया कमाल 
लुधियाना: 30 सितंबर 2017: (पंजाब स्क्रीन ब्यूरो)::
बच्चा मानसिक तौर पर कमज़ोर हो, उस पर गूंगा बहरा भी हो तो अंदाज़ा लगयाइये कि उसके गुम हो जाने पर परिवार के मन पर क्या गुज़रती है। जब लुधियाना का गोलू गुम हुआ तो परिवार की हालत बेहद बिगड़ गई। दशहरे का त्यौहार बेरंग हो रहा था। परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि गोलू की तलाश कहां करें। 
आखिर इसकी सूचना पुलिस को दी गयी और इस सूचना के बाद शुरू हुआ पुलिस का काम। पुलिस ने अपने तरीके से गोलू का सभी जगह पता लगाया लेकिन उसका कुछ पता न चला। परेशानी बढ़ रही थी लेकिन पुलिस की मेहनत रंग लायी। 
गोलू नाम का 10 साल का बच्चा पिछले दो दिनों से गुम था जिसका कोई पता नहीं च रहा था। इस बच्चे के परिवार वाले रो रो कर बेहाल थे। इसको 6 नंबर डिवीज़न की पुलिस ने ढूंढकर पिता के हवाले कर दिया।  गोलू के पिता सतिंदर राम ने बताया के उनका बच्चा मानसिक तौर पर कमजोर है और उसको ना तो सुनता है और ना वह बोल सकता है। वह दो दिन से शहीद भगत सिंह कॉलोनी से गुम  था और आज बच्चे के मिलने पर परिवार के लोग बहुत ही खुश हैं।  इस  के साथ ही साथ परिवार के लोगों ने पंजाब पुलिस का धन्यवाद भी किया।  यह 
जानकारी देते हुए मुंशी महिंदर पाल ने बताया के उनका परिवार पीछे से बिहार के रहने वाले हैं। की बरसों से लुधियाना में यहां शेरपुर में रहे हैं। इस बच्चे के लिए पूरे लुधियाना में पिछले दो दिन से वायरलेस की जा रही थी। इसी वायरलेस के जादू ने कमाल दिखाया और गोलू का पता चल गया। 
इसका और विवरण थाना 6 नंबर डिवीज़न के मुंशी महिंदर पाल से लिया जा सकता है। उनका मोबाइल नंबर है 7837018906